
संसदीय राजभाषा समिति क्या है? इसके गठन, कार्य एवं अधिकार
भारतीय लोकतंत्र में हिंदी को संघ की आधिकारिक भाषा के रूप में स्थापित करने और उसकी प्रगति की समीक्षा करने के लिए कई वैधानिक और संवैधानिक तंत्र बनाए गए हैं। इन्हीं में से सबसे महत्वपूर्ण और शक्तिशाली संस्था है—‘संसदीय राजभाषा समिति’ (Committee of Parliament on Official Language)। यह समिति सीधे भारतीय संसद के नियंत्रण में कार्य करती है और केंद्र सरकार के विभिन्न कार्यालयों, उपक्रमों तथा बैंकों में राजभाषा के कार्यान्वयन की निगरानी करती है।
इस लेख में हम संसदीय राजभाषा समिति के गठन, इसकी संरचना, इसके अधिकार, इसके कार्य, इसकी तीनों उप-समितियों की कार्यप्रणाली और परीक्षाओं के दृष्टिकोण से इसे याद रखने की आसान शॉर्ट ट्रिक्स को विस्तार से समझेंगे।
विषय सूची (Table of Contents)
1. संसदीय राजभाषा समिति का परिचय और पृष्ठभूमि
2. समिति का गठन और सदस्य संरचना
3. मूल कानूनी उद्धरण (Original Legal Citation)
4. समिति के प्रमुख कार्य और उद्देश्य
5. संसदीय राजभाषा समिति की तीन उप-समितियाँ और उनका कार्यक्षेत्र
6. समिति के अधिकार और राजभाषा निरीक्षण की प्रक्रिया
7. याद रखने की शॉर्ट ट्रिक्स (Memory Tricks)
8. संसदीय राजभाषा समिति और राजभाषा कार्यान्वयन समिति (OLIC) में अंतर
9. निष्कर्ष (Conclusion)
10. महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs) – संसदीय राजभाषा समिति
1. संसदीय राजभाषा समिति का परिचय और पृष्ठभूमि
संसदीय राजभाषा समिति का गठन भारतीय संविधान के किसी अनुच्छेद के तहत सीधे न होकर, राजभाषा अधिनियम, 1963 (Official Languages Act, 1963) की धारा 4 के प्रावधानों के अंतर्गत किया गया है।
संविधान लागू होने के बाद, राजभाषा के विकास की समीक्षा के लिए समय-समय पर संसदीय समितियों के गठन की आवश्यकता महसूस की गई। राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 4 के अनुसार, राजभाषा अधिनियम के पारित होने के दस वर्ष बाद (अर्थात 1973 के बाद) इस समिति का गठन किया जाना था। तदनुसार, जनवरी 1976 में पहली बार इस समिति का विधिवत गठन किया गया।
इस समिति का मुख्य उद्देश्य यह देखना है कि संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए हिंदी के प्रयोग में कितनी प्रगति हुई है और इसमें आ रही बाधाओं को कैसे दूर किया जा सकता है। यह समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट सीधे भारत के राष्ट्रपति को सौंपती है।
2. समिति का गठन और सदस्य संरचना
संसदीय राजभाषा समिति एक संयुक्त संसदीय समिति (Joint Parliamentary Committee) है, जिसमें संसद के दोनों सदनों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इसकी संरचना निम्नलिखित है:
* कुल सदस्य संख्या: समिति में कुल 30 सदस्य होते हैं।
* लोक सभा से: लोक सभा के 20 सदस्य।
* राज्य सभा से: राज्य सभा के 10 सदस्य।
* चुनाव प्रक्रिया: इन सदस्यों का चुनाव एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) के माध्यम से आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation) द्वारा संसद के सदस्यों द्वारा किया जाता है।
* समिति के अध्यक्ष: परंपरा के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री (Union Home Minister) को ही इस समिति का अध्यक्ष चुना जाता है। गृह मंत्री की व्यस्तता के कारण समिति के कार्यों के संचालन के लिए तीन उप-समितियाँ बनाई जाती हैं, जिनके अलग-अलग संयोजक (Conveners) होते हैं।
संसदीय राजभाषा समिति कोई स्थायी समिति नहीं है, बल्कि इसके सदस्यों का कार्यकाल लोक सभा के विघटन के साथ समाप्त हो जाता है। नई लोक सभा के गठन के बाद समिति का पुनर्गठन किया जाता है। राज्य सभा के सदस्य अपने सदन के नियमों के अनुसार बदलते रहते हैं।
3. मूल कानूनी उद्धरण (Original Legal Citation)
राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 4 के मूल कानूनी अंश निम्नलिखित हैं, जो इस समिति के वैधानिक अस्तित्व को दर्शाते हैं:
“धारा 4. राजभाषा के संबंध में समिति—
*(1) इस अधिनियम की धारा 3 के उपबंधों के लागू होने के दस वर्ष की समाप्ति के पश्चात, राजभाषा के संबंध में एक समिति, इस आशय का संकल्प संसद के किसी भी सदन में पेश किए जाने और दोनों सदनों द्वारा पारित किए जाने पर, गठित की जाएगी।*
*(2) इस समिति में तीस सदस्य होंगे, जिनमें से बीस लोक सभा के सदस्य होंगे और दस राज्य सभा के सदस्य होंगे, जो लोक सभा के सदस्यों और राज्य सभा के सदस्यों द्वारा क्रमशः आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा निर्वाचित होंगे।*
*(3) इस समिति का कर्तव्य होगा कि वह संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए हिंदी के प्रयोग में हुई प्रगति का पुनरावलोकन करे और उस पर सिफारिशें करते हुए राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजे…”*
4. समिति के प्रमुख कार्य और उद्देश्य
संसदीय राजभाषा समिति को व्यापक कार्य सौंपे गए हैं। इसके मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:
1. हिंदी के प्रगति की समीक्षा: केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों, संबद्ध व अधीनस्थ कार्यालयों, राष्ट्रीयकृत बैंकों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) और स्वायत्त निकायों में राजभाषा हिंदी के प्रयोग की समीक्षा करना।
2. संसदीय राजभाषा निरीक्षण: विभिन्न शहरों में जाकर केंद्रीय सरकारी कार्यालयों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से राजभाषा निरीक्षण (Official Language Inspection) करना।
3. राष्ट्रपति को रिपोर्ट सौंपना: राजभाषा के प्रयोग से संबंधित अपनी सिफारिशें और प्रगति विवरण तैयार कर राष्ट्रपति को सौंपना। राष्ट्रपति इस रिपोर्ट को संसद के प्रत्येक सदन के पटल पर रखवाते हैं और इसे सभी राज्य सरकारों को भी भेजा जाता है।
4. राजभाषा नीति के क्रियान्वयन में सुधार हेतु सुझाव: कार्यालयों में हिंदी टाइपिंग, अनुवादकों की कमी, हिंदी सॉफ्टवेयर की उपलब्धता और हिंदी प्रशिक्षण से संबंधित समस्याओं की पहचान करना और उनके समाधान के सुझाव देना।
5. संसदीय राजभाषा समिति की तीन उप-समितियाँ और उनका कार्यक्षेत्र
समिति के विशाल कार्यभार को सुचारू रूप से चलाने के लिए इसे तीन उप-समितियों (Sub-Committees) में विभाजित किया गया है। प्रत्येक उप-समिति में 10-10 सदस्य होते हैं और उनके अधीन विशिष्ट मंत्रालयों और विभागों का आवंटन किया जाता है:
| उप-समिति | कार्यक्षेत्र / मंत्रालय (Jurisdiction) | मुख्य फोकस क्षेत्र |
|---|---|---|
| पहली उप-समिति (First Sub-Committee) | रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, कानून और न्याय मंत्रालय, संसदीय कार्य मंत्रालय आदि। | नीतिगत और सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मंत्रालयों में राजभाषा अनुपालन। |
| दूसरी उप-समिति (Second Sub-Committee) | रेल मंत्रालय, संचार मंत्रालय (डाक व दूरसंचार), नागरिक उड्डयन मंत्रालय, जहाजरानी और परिवहन मंत्रालय आदि। | सार्वजनिक सेवाओं और परिवहन से संबंधित क्षेत्रों में हिंदी का प्रचार-प्रसार। |
| तीसरी उप-समिति (Third Sub-Committee) | वित्त मंत्रालय (सभी सरकारी बैंक, LIC), शिक्षा मंत्रालय, सार्वजनिक उपक्रम (PSUs), कोयला, ऊर्जा और पेट्रोलियम मंत्रालय आदि। | वित्तीय संस्थानों, बैंकों, तकनीकी उपक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों में हिंदी कार्यान्वयन। |
प्रत्येक उप-समिति देश के विभिन्न क्षेत्रों (क, ख और ग क्षेत्रों) का दौरा करती है और वहां के कार्यालयों का सघन निरीक्षण करती है।
6. समिति के अधिकार और राजभाषा निरीक्षण की प्रक्रिया
संसदीय राजभाषा समिति को संसद द्वारा विशेष विशेषाधिकार और अधिकार प्रदान किए गए हैं:
* रिकॉर्ड मंगाने का अधिकार: समिति किसी भी केंद्रीय कार्यालय से राजभाषा से संबंधित फाइलें, हिंदी पत्राचार के आंकड़े और अन्य दस्तावेज मंगा सकती है।
* अधिकारियों को तलब करना: निरीक्षण के दौरान संबंधित कार्यालय के administrative प्रमुख (जैसे सीएमडी, चेयरमैन, कमिश्नर, निदेशक) को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश देने का अधिकार है।
* प्रश्नावली (Questionnaire) भरवाना: निरीक्षण से पहले कार्यालयों को एक विस्तृत प्रश्नावली (प्रश्नावली खंड-1 और खंड-2) भेजनी होती है, जिसमें राजभाषा कार्यान्वयन का पूरा लेखा-जोखा होता है।
* दंडात्मक कार्रवाई का अभाव: यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि संसदीय राजभाषा समिति के पास किसी अधिकारी या कार्यालय को सीधे दंडित करने का अधिकार नहीं होता है। इसकी भूमिका पूरी तरह समीक्षात्मक और सुधारात्मक होती है। हालांकि, इसकी रिपोर्ट में की गई प्रतिकूल टिप्पणियां प्रशासनिक रूप से बहुत गंभीर मानी जाती हैं।
समिति की सिफारिशों को जब राष्ट्रपति द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है, तो वे राजभाषा विभाग (गृह मंत्रालय) के माध्यम से राष्ट्रपति के आदेश (Presidential Orders) के रूप में जारी की जाती हैं। इसके बाद इनका पालन करना सभी केंद्रीय कार्यालयों के लिए कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाता है।
7. याद रखने की शॉर्ट ट्रिक्स (Memory Tricks)
प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे SSC GST, राजभाषा अधिकारी) में इस समिति से जुड़े कई प्रश्न पूछे जाते हैं। इन्हें याद रखने के लिए निम्नलिखित शॉर्ट ट्रिक्स का उपयोग करें:
ट्रिक 1: सदस्यों की संख्या (30 = 20 + 10)
* शॉर्ट ट्रिक: “लोक में डबल राज”
* व्याख्या: लोक सभा में राज सभा से डबल सदस्य होते हैं।
* राज सभा = 10 सदस्य
* लोक सभा = 10 का डबल = 20 सदस्य
* कुल सदस्य = 20 + 10 = 30 सदस्य
ट्रिक 2: गठन का आधार और वर्ष (धारा 4, वर्ष 1976)
* शॉर्ट ट्रिक: “चौका मारा 76 में, समिति बनी राजभाषा में”
* व्याख्या:
* चौका = राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 4।
* 76 = समिति का गठन वर्ष 1976।
8. संसदीय राजभाषा समिति और राजभाषा कार्यान्वयन समिति (OLIC) में अंतर
अक्सर लोग संसदीय राजभाषा समिति और कार्यालय स्तर पर गठित होने वाली राजभाषा कार्यान्वयन समिति (Official Language Implementation Committee – OLIC) में भ्रमित हो जाते हैं। इन दोनों के मुख्य अंतर नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट हैं:
| मानदंड | संसदीय राजभाषा समिति | राजभाषा कार्यान्वयन समिति (OLIC) |
|---|---|---|
| स्तर | राष्ट्रीय / संसदीय स्तर (Apex Level) | व्यक्तिगत कार्यालय / संस्थान स्तर (Office Level) |
| गठन का आधार | राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 4 | राजभाषा नियम, 1976 का नियम 12 / प्रशासनिक आदेश |
| अध्यक्ष | केंद्रीय गृह मंत्री | कार्यालय के प्रशासनिक प्रधान (CMD / Director / Head of Office) |
| बैठकों की आवृत्ति | आवश्यकतानुसार (निरीक्षण दौरों के दौरान) | प्रत्येक तिमाही में कम से कम एक बार (4 बैठकें प्रति वर्ष) |
| मुख्य भूमिका | नीति समीक्षा और राष्ट्रपति को रिपोर्ट सौंपना | कार्यालय स्तर पर राजभाषा नीति के लक्ष्यों को धरातल पर लागू करना |
9. निष्कर्ष (Conclusion)
संसदीय राजभाषा समिति केवल एक जांच समिति नहीं है, बल्कि यह केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाले लाखों कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच राजभाषा के प्रति जागरूकता और अनुपालन सुनिश्चित करने वाला एक मार्गदर्शक निकाय है। इसके निरीक्षणों के डर और सम्मान के कारण ही आज बैंकों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में राजभाषा अनुभाग सक्रिय रूप से कार्य कर पा रहे हैं। इस समिति की रिपोर्ट के अब तक कई खंड राष्ट्रपति को सौंपे जा चुके हैं, जिन्होंने देश में हिंदी के प्रयोग की रूपरेखा को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
10. महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs) – संसदीय राजभाषा समिति
Q1. संसदीय राजभाषा समिति का गठन किस कानून के तहत किया गया है?
उत्तर: इसका गठन राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 4 के तहत किया गया है।
Q2. संसदीय राजभाषा समिति में कुल कितने सदस्य होते हैं?
उत्तर: समिति में कुल 30 सदस्य होते हैं, जिसमें 20 लोक सभा से और 10 राज्य सभा से चुने जाते हैं।
Q3. इस समिति के अध्यक्ष कौन होते हैं?
उत्तर: पारंपरिक रूप से भारत के केंद्रीय गृह मंत्री (Union Home Minister) इस समिति के अध्यक्ष होते हैं।
Q4. संसदीय राजभाषा समिति का गठन पहली बार किस वर्ष किया गया था?
उत्तर: इस समिति का गठन पहली बार जनवरी 1976 में किया गया था।
Q5. संसदीय राजभाषा समिति अपनी रिपोर्ट किसे सौंपती है?
उत्तर: समिति अपनी रिपोर्ट भारत के राष्ट्रपति को सौंपती है।
Q6. क्या संसदीय राजभाषा समिति किसी कर्मचारी को दंडित कर सकती है?
उत्तर: नहीं, समिति के पास सीधे दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। यह केवल समीक्षा और सिफारिशें कर सकती है।
Q7. समिति की कुल कितनी उप-समितियां हैं?
उत्तर: समिति की कुल तीन उप-समितियां (First, Second, and Third Sub-Committees) हैं, जो अलग-अलग मंत्रालयों की निगरानी करती हैं।
Q8. सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों का राजभाषा निरीक्षण कौन सी उप-समिति करती है?
उत्तर: सरकारी बैंकों, एलआईसी और वित्तीय संस्थानों का निरीक्षण तीसरी उप-समिति (Third Sub-Committee) द्वारा किया जाता है।
Q9. समिति के सदस्यों का चुनाव कैसे होता है?
उत्तर: सदस्यों का चुनाव संसद के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा किया जाता है।
Q10. क्या समिति की सिफारिशें बाध्यकारी होती हैं?
उत्तर: समिति की सिफारिशें राष्ट्रपति द्वारा स्वीकार किए जाने और राजभाषा विभाग द्वारा आदेश के रूप में जारी होने के बाद सभी मंत्रालयों के लिए बाध्यकारी हो जाती हैं।
