
राजभाषा नियम, 1976 क्या हैं? सरल भाषा में पूरी जानकारी
भारत एक बहुभाषी देश है, जहाँ प्रशासनिक कार्यों में भाषाई समन्वय स्थापित करने के लिए राजभाषा संबंधी कानूनों का निर्माण किया गया है। भारतीय संविधान के भाग 17 और राजभाषा अधिनियम, 1963 के उद्देश्यों को अमली जामा पहनाने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 1976 में एक अत्यंत महत्वपूर्ण नियमावली तैयार की, जिसे ‘राजभाषा (संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग) नियम, 1976’ (Official Language Rules, 1976) कहा जाता है।
यह नियमावली सरकारी कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने और उसकी निगरानी करने के लिए मार्गदर्शिका की तरह कार्य करती है। इस लेख में हम राजभाषा नियम, 1976 के सभी 12 नियमों, विभिन्न क्षेत्रों (क, ख, ग) के वर्गीकरण, याद रखने की शॉर्ट ट्रिक्स और इससे जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी संदर्भों को बेहद आसान और रोचक तरीके से समझेंगे।
विषय सूची (Table of Contents)
1. राजभाषा नियम, 1976 का मूल उद्देश्य 2. मूल कानूनी उद्धरण (Original Legal Citation) 3. नियमों के अंतर्गत भारत का भौगोलिक वर्गीकरण (क्षेत्र क, ख, ग) 4. राजभाषा नियम, 1976 के सभी 12 नियम विस्तार से 5. राजभाषा नियमों को याद रखने की जादुई शॉर्ट ट्रिक 6. निष्कर्ष (Conclusion) 7. राजभाषा नियम 1976 से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)1. राजभाषा नियम, 1976 का मूल उद्देश्य
राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 8 द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार ने इन नियमों को बनाया था। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केंद्र सरकार के विभिन्न कार्यालयों, मंत्रालयों और सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) में फाइलों पर टिप्पण (Noting), पत्राचार (Correspondence) और दस्तावेजों के प्रकाशन में राजभाषा हिंदी का प्रयोग किस प्रकार चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाए। यह नियम तमिलनाडु राज्य को छोड़कर पूरे भारत में लागू होते हैं।
2. मूल कानूनी उद्धरण (Original Legal Citation)
राजभाषा नियम, 1976 के प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से लिखा गया है:
*”राजभाषा अधिनियम, 1963 (1963 का 19) की धारा 8 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात्:- राजभाषा (संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग) नियम, 1976। ये नियम तमिलनाडु राज्य को छोड़कर संपूर्ण भारत पर लागू होंगे।”*
3. नियमों के अंतर्गत भारत का भौगोलिक वर्गीकरण
राजभाषा नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूरे देश को हिंदी के प्रयोग की स्थिति के आधार पर तीन क्षेत्रों में बांटा गया है:
| क्षेत्र (Region) | शामिल राज्य और केंद्र शासित प्रदेश (States & UTs) | पत्राचार की भाषा (Communication) |
|---|---|---|
| क्षेत्र ‘क’ (Region A) | बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और अंडमान निकोबार द्वीप समूह। | पूर्णतः हिंदी (Hindi Only) |
| क्षेत्र ‘ख’ (Region B) | गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, चंडीगढ़, दमन और दीव तथा दादरा और नगर हवेली। | सामान्यतः हिंदी/द्विभाषी (Bilingual) |
| क्षेत्र ‘ग’ (Region C) | तमिलनाडु को छोड़कर अन्य सभी दक्षिण भारतीय व पूर्वोत्तर राज्य (जैसे पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, केरल, असम आदि)। | अंग्रेजी (English) |
4. राजभाषा नियम, 1976 के सभी 12 नियम विस्तार से
राजभाषा नियम, 1976 में कुल 12 नियमों का प्रावधान है जो निम्नलिखित हैं:
नियम 1: संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ
इस नियम के तहत इसे “राजभाषा (संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग) नियम, 1976” कहा जाता है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि यह नियम तमिलनाडु राज्य में लागू नहीं होता है।नियम 2: परिभाषाएं
इसमें नियमों में प्रयुक्त होने वाले तकनीकी शब्दों को परिभाषित किया गया है, जैसे “कार्यालय”, “कर्मचारी”, “प्रवीणता” और “कार्यसाधक ज्ञान”।नियम 3: राज्यों आदि से पत्राचार
यह नियम बताता है कि केंद्र सरकार के कार्यालयों से विभिन्न क्षेत्रों (क, ख, ग) के राज्यों को भेजे जाने वाले पत्र किस भाषा में होंगे: * कार्यालय से क्षेत्र ‘क’ के किसी राज्य या व्यक्ति को पत्राचार केवल हिंदी में होगा। * कार्यालय से क्षेत्र ‘ख’ के किसी राज्य को सामान्यतः पत्र हिंदी में भेजे जाएंगे (यदि अंग्रेजी में भेजा जाता है, तो हिंदी अनुवाद साथ होगा)। * क्षेत्र ‘ग’ के राज्यों को पत्राचार अंग्रेजी में किया जाएगा।नियम 4: केंद्र सरकार के कार्यालयों के बीच पत्राचार
* क्षेत्र ‘क’ के कार्यालयों के बीच आपसी पत्राचार केवल हिंदी में होगा। * क्षेत्र ‘क’ और ‘ख’ के बीच पत्राचार द्विभाषी रूप में हो सकता है। * क्षेत्र ‘ग’ के कार्यालयों के साथ सामान्यतः अंग्रेजी का प्रयोग होता है।नियम 5: हिंदी में प्राप्त पत्रों के उत्तर
नियम 6: दोनों भाषाओं का प्रयोग (धारा 3(3) के दस्तावेज)
राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 3(3) के अंतर्गत आने वाले सभी 14 दस्तावेजों (जैसे सामान्य आदेश, परिपत्र, निविदाएं, प्रेस विज्ञप्ति, आदि) के लिए हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं का एक साथ प्रयोग किया जाना अनिवार्य है। इन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी की यह व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी कि वह पत्राचार को द्विभाषी रूप में सुनिश्चित करे।नियम 7: आवेदन, अभ्यावेदन आदि
कोई भी कर्मचारी अपना आवेदन, याचिका या अपील हिंदी या अंग्रेजी में प्रस्तुत कर सकता है। यदि कर्मचारी हिंदी में हस्ताक्षर करता है या हिंदी में उत्तर की मांग करता है, तो उसे उत्तर हिंदी में ही दिया जाएगा।नियम 8: केंद्रीय सरकार के कार्यालयों में टिप्पण (Noting)
कोई भी कर्मचारी फाइलों पर अपनी टिप्पणी (Noting) या आलेख (Drafting) हिंदी या अंग्रेजी में लिख सकता है। उससे किसी अन्य भाषा में अनुवाद की मांग नहीं की जा सकती।नियम 9: हिंदी में प्रवीणता (Proficiency in Hindi)
यदि किसी कर्मचारी ने मैट्रिक या उससे उच्च परीक्षा हिंदी विषय के साथ उत्तीर्ण की है, या स्नातक स्तर पर हिंदी एक स्वैच्छिक विषय रही है, तो उसे हिंदी में प्रवीण माना जाता है।नियम 10: हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान (Working Knowledge)
यदि किसी कर्मचारी ने मैट्रिक परीक्षा में हिंदी एक विषय के रूप में उत्तीर्ण की है, या राजभाषा विभाग की प्राज्ञ (Pragya) परीक्षा उत्तीर्ण की है, तो उसे हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त माना जाता है।नियम 11: मैनुअल, कोड, प्रक्रिया संबंधी साहित्य और स्टेशनरी
केंद्र सरकार के कार्यालयों के सभी मैनुअल, कोड, स्टेशनरी, रबर की मुहरें, लेटरहेड और नामपट्ट (Nameplates) हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं (द्विभाषी) में होने अनिवार्य हैं।नियम 12: अनुपालन का उत्तरदायित्व (Responsibility for Compliance)
5. राजभाषा नियमों को याद रखने की जादुई शॉर्ट ट्रिक
राजभाषा नियमों के 12 बिंदुओं और भौगोलिक क्षेत्रों को याद रखने के लिए निम्नलिखित काव्य और सूत्र (Formula) को याद रखें:
क्षेत्र वर्गीकरण के लिए शॉर्ट ट्रिक:
> *”क से ‘कमर’ (पूर्ण हिंदी पट्टी – बिहार, एमपी, यूपी, राजस्थान आदि)* > *ख से ‘खास’ (महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब जहाँ हिंदी समझी जाती है)* > *ग से ‘गैर-हिंदी’ (बाकी सभी दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्य)”*12 नियमों के मुख्य क्रम को याद करने का सूत्र:
“नाम-परिभाषा-पत्राचार (3-4) | उत्तर-द्विभाषी-आवेदन (5-6-7) | टिप्पण-ज्ञान (8-9-10) | स्टेशनरी-जिम्मेदारी (11-12)”* 1-2: नाम और परिभाषा (Name & Definitions)
* 3-4: राज्यों और कार्यालयों के बीच पत्राचार (Correspondence)
* 5-6: हिंदी पत्रों के उत्तर और द्विभाषी दस्तावेज (Replies & Bilingual Docs)
* 7-8: कर्मचारियों के आवेदन और नोटिंग (Applications & Noting)
* 9-10: हिंदी प्रवीणता और कार्यसाधक ज्ञान (Proficiency & Working Knowledge)
* 11-12: स्टेशनरी का द्विभाषी रूप और प्रधान का दायित्व (Stationery & Responsibility)
6. निष्कर्ष
राजभाषा नियम, 1976 भारत सरकार के कार्यालयों में हिंदी के उत्तरोत्तर प्रयोग को सुनिश्चित करने वाली रीढ़ की हड्डी है। इन नियमों का पालन न केवल कानूनी बाध्यता है, बल्कि यह देश के प्रशासनिक तंत्र को जनसामान्य की भाषा से जोड़ने का एक संवेदनशील माध्यम भी है। राजभाषा अधिकारियों और प्रशासनिक प्रमुखों को इन नियमों का गहन ज्ञान होना अनिवार्य है।
