राजभाषा अधिनियम, 1963 : धारा 3(3) — अध्ययन नोट्स
राजभाषा अधिनियम, 1963
धारा 3(3) – अध्ययन नोट्स
धारा 3(3) क्या है?
राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 3(3) के अनुसार केंद्र सरकार के कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में एक साथ जारी किए जाना अनिवार्य है।
इसका उद्देश्य सरकारी कार्यों में भाषाई समानता बनाए रखना तथा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना है।
धारा 3(3) के अंतर्गत आने वाले दस्तावेज
- संकल्प (Resolutions)
- सामान्य आदेश (General Orders)
- नियम (Rules)
- अधिसूचनाएँ (Notifications)
- प्रशासनिक एवं अन्य प्रतिवेदन (Administrative Reports)
- प्रेस विज्ञप्तियाँ (Press Releases)
- संसद के समक्ष रखे जाने वाले दस्तावेज
- अनुबंध, करार, लाइसेंस, परमिट एवं निविदाएँ
मुख्य विशेषताएँ
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| द्विभाषिकता | हिंदी और अंग्रेजी दोनों में जारी करना अनिवार्य |
| एक साथ जारी करना | दोनों संस्करण समान समय पर जारी हों |
| लागू क्षेत्र | केंद्र सरकार के मंत्रालय, विभाग एवं कार्यालय |
| महत्व | राजभाषा नीति के अनुपालन का प्रमुख आधार |
उदाहरण
✔ वित्त मंत्रालय द्वारा कार्यालय आदेश हिंदी और अंग्रेजी दोनों में एक ही दिन जारी किया गया।
✘ पहले अंग्रेजी में अधिसूचना जारी की गई तथा हिंदी संस्करण कई दिन बाद जारी हुआ।
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रश्न 1: धारा 3(3) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में एक साथ जारी करना।
उत्तर: महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में एक साथ जारी करना।
प्रश्न 2: क्या प्रेस विज्ञप्ति धारा 3(3) के अंतर्गत आती है?
उत्तर: हाँ।
उत्तर: हाँ।
प्रश्न 3: “एक साथ जारी करना” का क्या अर्थ है?
उत्तर: हिंदी और अंग्रेजी दोनों संस्करणों को समान समय पर जारी करना।
उत्तर: हिंदी और अंग्रेजी दोनों संस्करणों को समान समय पर जारी करना।
त्वरित सार (Quick Revision)
अधिनियम: राजभाषा अधिनियम, 1963
धारा: 3(3)
मुख्य प्रावधान: महत्वपूर्ण दस्तावेज हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में एक साथ जारी होंगे।
कुंजी शब्द: द्विभाषी + एक साथ
परीक्षा सूत्र: “धारा 3(3) = महत्वपूर्ण दस्तावेजों का अनिवार्य द्विभाषी प्रकाशन”