
राजभाषा त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट कैसे भरें? चरण-दर-चरण प्रक्रिया
भारत सरकार के अधीन आने वाले सभी मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs), राष्ट्रीयकृत बैंकों और स्वायत्त निकायों में राजभाषा हिंदी के प्रगामी प्रयोग (Progressive Use of Hindi) की निगरानी के लिए त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट (Quarterly Progress Report – QPR) एक सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक उपकरण है। राजभाषा विभाग (गृह मंत्रालय) द्वारा प्रतिवर्ष जारी वार्षिक कार्यक्रम (Annual Programme) के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा रहा है या नहीं, इसका वास्तविक मूल्यांकन इसी रिपोर्ट के माध्यम से होता है।
कई कार्यालयों में राजभाषा समन्वयकों या राजभाषा अधिकारियों को इस रिपोर्ट को तैयार करने और ऑनलाइन पोर्टल पर भरने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। आँकड़ों के गलत मिलान और नियमों की सही जानकारी न होने के कारण अक्सर रिपोर्ट अस्वीकृत हो जाती है। इस लेख में हम राजभाषा त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट को सही तरीके से भरने की पूरी प्रक्रिया को सरल और विस्तृत रूप में समझेंगे।
विषय सूची (Table of Contents)
1. राजभाषा त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट (QPR) क्या है और इसका महत्व
2. संवैधानिक एवं कानूनी आधार (राजभाषा नियम, 1976 का नियम 12)
3. क्षेत्रीय वर्गीकरण और पत्राचार के निर्धारित लक्ष्य (क, ख और ग क्षेत्र)
4. त्रैमासिक रिपोर्ट के विभिन्न भाग और उन्हें भरने की चरण-दर-चरण विधि
– भाग 1: सामान्य जानकारी और स्टाफ की स्थिति
– भाग 2: हिंदी पत्राचार (Correspondence) के आँकड़े
– भाग 3: धारा 3(3) के दस्तावेजों का अनुपालन
– भाग 4: राजभाषा कार्यान्वयन समिति (OLIC) की बैठकें
– भाग 5: हिंदी प्रशिक्षण (Training) और कंप्यूटर का उपयोग
– भाग 6: हिंदी पुस्तकालय और अन्य गतिविधियाँ
5. रिपोर्ट भरते समय होने वाली 5 सामान्य गलतियाँ और उनसे बचाव
6. त्रैमासिक रिपोर्ट के लक्ष्यों को याद रखने की शॉर्ट ट्रिक
7. निष्कर्ष (Conclusion)
8. राजभाषा त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
1. राजभाषा त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट (QPR) क्या है और इसका महत्व
राजभाषा त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट (QPR) एक ऐसा प्रपत्र है जिसमें किसी भी केंद्रीय सरकारी कार्यालय द्वारा एक तिमाही (Quarter) के दौरान राजभाषा हिंदी में किए गए कार्यों का सांख्यिकीय और गुणात्मक लेखा-जोखा होता है।
यह रिपोर्ट प्रत्येक तिमाही के समाप्त होने के बाद अगले महीने की 15 तारीख तक अपने उच्च कार्यालय और प्रशासनिक मंत्रालय को भेजी जानी आवश्यक होती है।
तिमाही चक्र (Quarterly Cycles):
1. प्रथम तिमाही: 1 अप्रैल से 30 जून (रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तिथि: 15 जुलाई)
2. द्वितीय तिमाही: 1 जुलाई से 30 सितंबर (रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तिथि: 15 अक्टूबर)
3. तृतीय तिमाही: 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर (रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तिथि: 15 जनवरी)
4. चतुर्थ तिमाही: 1 जनवरी से 31 मार्च (रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तिथि: 15 अप्रैल)
यह रिपोर्ट केवल एक सांख्यिकीय खानापूर्ति नहीं है, बल्कि इसके आधार पर विभाग/कार्यालय को ‘इंदिरा गांधी राजभाषा पुरस्कार’ या अन्य सरकारी सम्मानों के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाता है। साथ ही संसदीय राजभाषा समिति के निरीक्षण के दौरान इस रिपोर्ट के पिछले तीन वर्षों के आँकड़ों का गहन मिलान किया जाता है।
2. संवैधानिक एवं कानूनी आधार (राजभाषा नियम, 1976 का नियम 12)
राजभाषा नीति के क्रियान्वयन और उसकी प्रगति की रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी केवल राजभाषा अधिकारी की नहीं होती, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक तंत्र की सामूहिक जिम्मेदारी है। राजभाषा नियम, 1976 के नियम 12 (Rule 12 of Official Languages Rules, 1976) में इस उत्तरदायित्व को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है:
राजभाषा नियम 12: प्रशासनिक उत्तरदायित्व
*”प्रत्येक केंद्रीय सरकारी कार्यालय के प्रशासनिक प्रधान का यह उत्तरदायित्व होगा कि वह यह सुनिश्चित करे कि अधिनियम और इन नियमों के उपबंधों तथा राजभाषा के प्रयोग के संबंध में जारी किए गए निदेशों का उचित और प्रभावी रूप से अनुपालन किया जा रहा है और इस प्रयोजन के लिए उपयुक्त और प्रभावकारी जांच की व्यवस्था की जाए।”*
इस नियम के तहत, त्रैमासिक रिपोर्ट पर अंतिम हस्ताक्षर कार्यालय प्रमुख (Head of Office) के होते हैं, जिसका अर्थ है कि रिपोर्ट में दिए गए आँकड़ों की सत्यता के लिए प्रशासनिक प्रधान सीधे तौर पर उत्तरदायी हैं।
3. क्षेत्रीय वर्गीकरण और पत्राचार के निर्धारित लक्ष्य (क, ख और ग क्षेत्र)
राजभाषा नियमों के अनुसार भारत को तीन भौगोलिक क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है: ‘क’ (Region A), ‘ख’ (Region B) और ‘ग’ (Region C)। त्रैमासिक रिपोर्ट भरते समय इन क्षेत्रों के लिए निर्धारित लक्ष्यों को ध्यान में रखना अनिवार्य है:
| पत्राचार का प्रकार (Correspondence Type) | ‘क’ क्षेत्र (Region A) | ‘ख’ क्षेत्र (Region B) | ‘ग’ क्षेत्र (Region C) |
| :— | :—: | :—: | :—: |
| क से क क्षेत्र को | 100% | – | – |
| क से ख क्षेत्र को | 100% | – | – |
| क से ग क्षेत्र को | 65% | – | – |
| ख से क और ख को | – | 90% | – |
| ख से ग क्षेत्र को | – | 55% | – |
| ग से क, ख और ग को | – | – | 55% |
| हिंदी में प्राप्त पत्रों के उत्तर | 100% | 100% | 100% |
| धारा 3(3) के दस्तावेज (द्विभाषी) | 100% | 100% | 100% |
चाहे आपका कार्यालय किसी भी क्षेत्र (क, ख या ग) में स्थित हो, यदि कोई पत्र हिंदी में प्राप्त होता है, तो राजभाषा नियम 5 के तहत उसका उत्तर केवल हिंदी में देना 100% अनिवार्य है। त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट में इस कॉलम में कभी भी 100% से कम अनुपालन नहीं होना चाहिए।
4. त्रैमासिक रिपोर्ट के विभिन्न भाग और उन्हें भरने की चरण-दर-चरण विधि
राजभाषा त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट के प्रपत्र में कुल मिलाकर निम्नलिखित मुख्य खंड (Sections) होते हैं:
भाग 1: सामान्य जानकारी और स्टाफ की स्थिति
इस खंड में आपके कार्यालय का मूल विवरण भरा जाता है:
* कार्यालय का नाम और पता: पूरा और स्पष्ट नाम।
* क्षेत्र (Region): क, ख या ग में से कोई एक।
* कुल स्टाफ की संख्या: राजपत्रित (Gazetted) और अराजपत्रित (Non-Gazetted) कर्मचारियों की संख्या।
* हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान (Working Knowledge) / प्रवीणता (Proficiency) प्राप्त स्टाफ: कितने कर्मचारियों को हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान है। यदि कार्यालय के 80% कर्मचारियों को कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त हो चुका है, तो उस कार्यालय को राजभाषा नियम 10(4) के तहत राजपत्र में अधिसूचित (Notify) किया जाना आवश्यक है।
भाग 2: हिंदी पत्राचार (Correspondence) के आँकड़े
यह रिपोर्ट का सबसे संवेदनशील हिस्सा है। यहाँ आपको तिमाही के दौरान भेजे गए कुल पत्रों का विवरण देना होता है:
1. मूल रूप से भेजे गए कुल पत्र (Origin of Letters):
– ‘क’ क्षेत्र को भेजे गए पत्र (हिंदी में और अंग्रेजी में अलग-अलग)
– ‘ख’ क्षेत्र को भेजे गए पत्र (हिंदी में और अंग्रेजी में अलग-अलग)
– ‘ग’ क्षेत्र को भेजे गए पत्र (हिंदी में और अंग्रेजी में अलग-अलग)
2. प्रतिशत गणना (Percentage Calculation):
$$\text{हिंदी पत्राचार \%} = \left( \frac{\text{हिंदी में भेजे गए पत्रों की संख्या}}{\text{भेजे गए कुल पत्रों की संख्या (हिंदी + अंग्रेजी)}} \right) \times 100$$
3. प्राप्त पत्र और उत्तर:
– हिंदी में प्राप्त कुल पत्र कितने थे?
– उनमें से कितने पत्रों का उत्तर दिया गया?
– उत्तरों में से कितने हिंदी में दिए गए और कितने अंग्रेजी में (अंग्रेजी में उत्तर शून्य होना चाहिए)?
भाग 3: धारा 3(3) के दस्तावेजों का अनुपालन
राजभाषा अधिनियम 1963 की धारा 3(3) के तहत निर्दिष्ट 14 श्रेणियों के दस्तावेज केवल द्विभाषी (Bilingual – हिंदी और अंग्रेजी दोनों में) रूप में ही जारी किए जा सकते हैं। इस खंड में आपको निम्नलिखित विवरण भरना होता है:
* जारी किए गए कुल दस्तावेजों की संख्या (जैसे सामान्य आदेश, निविदाएं, संविदाएं, अधिसूचनाएं आदि)।
* द्विभाषी रूप में जारी किए गए दस्तावेजों की संख्या।
* केवल अंग्रेजी या केवल हिंदी में जारी दस्तावेजों की संख्या (यह शून्य होनी चाहिए)।
* यदि अनुपालन 100% नहीं है, तो उसके स्पष्ट कारण और उत्तरदायी अधिकारी के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण।
भाग 4: राजभाषा कार्यान्वयन समिति (OLIC) की बैठकें
प्रत्येक केंद्रीय कार्यालय में हर तिमाही में कम से कम एक राजभाषा कार्यान्वयन समिति (OLIC) की बैठक होना अनिवार्य है। इस खंड में भरें:
* तिमाही के दौरान आयोजित बैठक की तिथि।
* यदि बैठक आयोजित नहीं की गई, तो उसके ठोस कारण।
* बैठक में लिए गए निर्णयों पर अनुवर्ती कार्रवाई (Action Taken Report – ATR) की स्थिति।
भाग 5: हिंदी प्रशिक्षण (Training) और कंप्यूटर का उपयोग
* हिंदी भाषा / टाइपिंग / आशुलिपि प्रशिक्षण: प्रशिक्षण के लिए शेष बचे कर्मचारियों की संख्या और इस तिमाही में भेजे गए कर्मचारियों की संख्या।
* कंप्यूटरों की संख्या: कार्यालय में कुल कंप्यूटरों की संख्या और द्विभाषी (Bilingual) रूप में काम करने योग्य कंप्यूटरों की संख्या (आजकल सभी कंप्यूटरों में यूनिकोड इंस्टॉल होना चाहिए, अतः यह संख्या 100% होनी चाहिए)।
* हिंदी वेबसाइट: क्या कार्यालय की वेबसाइट द्विभाषी है? यदि नहीं, तो अपडेट की स्थिति क्या है?
भाग 6: हिंदी पुस्तकालय और अन्य गतिविधियाँ
* पुस्तकों की खरीद पर व्यय: कुल बजट का न्यूनतम 50% हिंदी पुस्तकों की खरीद पर व्यय किया जाना चाहिए (ग क्षेत्र के लिए यह छूट के साथ 25% तक हो सकता है)।
* हिंदी पत्र-पत्रिकाएं: पुस्तकालय में आने वाली हिंदी और अंग्रेजी पत्र-पत्रिकाओं की संख्या।
* कार्यशालाएं (Workshops): इस तिमाही में आयोजित हिंदी कार्यशालाओं की संख्या और प्रशिक्षित कर्मचारियों की संख्या।
5. रिपोर्ट भरते समय होने वाली 5 सामान्य गलतियाँ और उनसे बचाव
त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट तैयार करते समय कई लिपिकीय त्रुटियां हो जाती हैं, जिन्हें बाद में सुधारना कठिन होता है। यहाँ 5 सबसे सामान्य गलतियाँ और उनके समाधान दिए गए हैं:
1. प्राप्त हिंदी पत्रों का उत्तर अंग्रेजी में देना: यह राजभाषा नियम 5 का सीधा उल्लंघन है। रिपोर्ट में ‘प्राप्त हिंदी पत्रों की संख्या’ और ‘हिंदी में दिए गए उत्तरों की संख्या’ हमेशा बराबर होनी चाहिए (यदि उत्तर देना आवश्यक हो)।
2. धारा 3(3) में 100% से कम अनुपालन दिखाना: धारा 3(3) का अनुपालन कानूनी रूप से अनिवार्य है। यदि रिपोर्ट में यहाँ 99% भी लिखा जाता है, तो उच्च अधिकारियों द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया जा सकता है।
3. यूनिकोड (Unicode) आधारित कंप्यूटरों की संख्या कम दिखाना: वर्तमान में विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम में हिंदी फॉन्ट स्वतः इन-बिल्ट होते हैं। अतः सभी कंप्यूटर द्विभाषी श्रेणी में आते हैं। इसे 100% ही दर्शाना चाहिए।
4. पुस्तकालय बजट का गलत वर्गीकरण: तकनीकी पुस्तकों के अलावा सामान्य साहित्य की खरीद में हिंदी पुस्तकों का हिस्सा न्यूनतम 50% होना चाहिए। इसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
5. बैठकों के आयोजन में देरी: तिमाही समाप्त होने से पहले बैठक करना आवश्यक है। कई बार दो बैठकों के बीच 4 महीने से अधिक का अंतराल हो जाता है, जो नियमों के विरुद्ध है।
6. त्रैमासिक रिपोर्ट के लक्ष्यों को याद रखने की शॉर्ट ट्रिक
त्रैमासिक रिपोर्ट के प्रमुख लक्ष्यों और अनुच्छेदों को याद रखने के लिए यह आसान याद रखने वाली शार्ट ट्रिक (Memory Trick) देखें:
- नियम 12 (Rule 12): प्रशासनिक मुखिया का ‘उत्तरदायित्व’ (1+2 = 3 शक्तियाँ – मुखिया, नियम और रिपोर्ट)।
- क-ख-ग पत्राचार लक्ष्य (100 – 90 – 55):
- क्षेत्र ‘क’ (सर्वश्रेष्ठ): 100%
- क्षेत्र ‘ख’ (मध्यम): 90%
- क्षेत्र ‘ग’ (न्यूनतम): 55% (पत्राचार लक्ष्य)
- नियम 5 (Rule 5): ‘पाँच’ उंगलियों से ‘पत्र’ का उत्तर हमेशा ‘हिंदी’ में (100% अनिवार्य)।
7. निष्कर्ष
राजभाषा त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट केवल एक सांख्यिकीय दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह आपके कार्यालय की भाषाई निष्ठा और संवैधानिक नियमों के प्रति सम्मान का प्रतीक है। इसे समय पर और सटीक रूप से भरना राजभाषा नीति के सफल क्रियान्वयन की दिशा में पहला कदम है। प्रत्येक राजभाषा अधिकारी और कार्यालय प्रमुख को चाहिए कि वे पत्राचार और धारा 3(3) के अनुपालन की साप्ताहिक जांच करें, ताकि तिमाही के अंत में रिपोर्ट तैयार करते समय किसी विसंगति का सामना न करना पड़े।
8. राजभाषा त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
Q1. राजभाषा त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट (QPR) जमा करने की अंतिम तिथि क्या है?
यह रिपोर्ट प्रत्येक तिमाही समाप्त होने के पश्चात अगले महीने की 15 तारीख (जैसे- 15 जुलाई, 15 अक्टूबर, 15 जनवरी और 15 अप्रैल) तक भेजना अनिवार्य है।
Q2. यदि किसी तिमाही में कोई बैठक आयोजित न हो, तो क्या करना चाहिए?
यदि किसी अनिवार्य कारण से बैठक आयोजित नहीं हो पाई है, तो रिपोर्ट के भाग 4 में इसके स्पष्ट और संतोषजनक कारणों का उल्लेख करना होगा तथा अगली तिमाही के पहले सप्ताह में बैठक का आयोजन सुनिश्चित करना होगा।
Q3. क्या ईमेल पर भेजे गए संदेश भी पत्राचार के आँकड़ों में शामिल होते हैं?
हाँ, वर्तमान डिजिटल युग में राजभाषा विभाग के निर्देशों के अनुसार, आधिकारिक ईमेल आईडी से भेजे गए सभी आधिकारिक ईमेल भी पत्राचार के आँकड़ों में शामिल किए जाते हैं।
Q4. राजभाषा नियम 10(4) के तहत कार्यालय को कब अधिसूचित किया जाता है?
जब किसी केंद्रीय सरकारी कार्यालय के 80% या उससे अधिक कर्मचारियों ने हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कर लिया हो, तो उस कार्यालय को राजपत्र (Gazette) में अधिसूचित किया जाता है।
Q5. क्या धारा 3(3) के दस्तावेजों का 100% अनुपालन न होने पर कोई दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है?
हाँ, धारा 3(3) का उल्लंघन कानूनन गंभीर माना जाता है। राजभाषा नियम 12 के तहत इसके लिए कार्यालय प्रमुख और हस्ताक्षरकर्ता अधिकारी सीधे जिम्मेदार होते हैं, जिनसे स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है।
Q6. पुस्तकालय के कुल बजट का कितना प्रतिशत हिंदी पुस्तकों पर खर्च करना अनिवार्य है?
वार्षिक कार्यक्रम के अनुसार, क और ख क्षेत्रों के लिए पुस्तकालय के कुल पुस्तक खरीद बजट का न्यूनतम 50% हिंदी पुस्तकों पर और ग क्षेत्र के लिए न्यूनतम 25% खर्च करना अनिवार्य है।
Q7. क्या हिंदी कार्यशाला (Hindi Workshop) का आयोजन हर तिमाही में आवश्यक है?
हाँ, प्रशासनिक कर्मचारियों में हिंदी के प्रति झिझक दूर करने के लिए प्रति तिमाही कम से कम एक हिंदी कार्यशाला का आयोजन आवश्यक है।
Q8. यदि कोई कार्यालय ग क्षेत्र में है, तो क्या उसे भी त्रैमासिक रिपोर्ट भेजनी होगी?
हाँ, भारत के किसी भी हिस्से (क, ख या ग क्षेत्र) में स्थित सभी केंद्रीय सरकारी कार्यालयों, राष्ट्रीयकृत बैंकों और सार्वजनिक उपक्रमों के लिए यह रिपोर्ट भेजना पूर्णतः अनिवार्य है।
Q9. कंप्यूटरों के लिए राजभाषा विभाग की क्या नीति है?
कार्यालय के सभी कंप्यूटरों में द्विभाषी क्षमता (Bilingual capacity) होनी चाहिए, जिसे प्राप्त करने के लिए कंप्यूटरों में यूनिकोड फॉन्ट (जैसे- मंगल, कोकिला) का इंस्टॉलेशन और हिंदी कीबोर्ड लेआउट सक्रिय होना आवश्यक है।
