FDDI Junior Hindi Translator Vacancy 2025 – Apply Now
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राजभाषा अधिनियम की धारा 3(3) के अनुसार, द्विभाषी दस्तावेज़ों (हिंदी और अंग्रेज़ी) को जारी करने की जिम्मेदारी उन अधिकारियों की होती है जो उन पर हस्ताक्षर करते हैं। यह एक कानूनी दायित्व है जिसमें छूट नहीं दी जा सकती।
राजभाषा अधिनियम 1963 की धारा 3(3) के अंतर्गत केंद्र सरकार के नियंत्रणाधीन कार्यालयों में 14 प्रकार के महत्वपूर्ण दस्तावेजों को हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में जारी करना अनिवार्य है, ताकि सूचना सभी नागरिकों तक समान रूप से पहुँचे।
राजभाषा अधिनियम 1963 भारत में केंद्र सरकार के राजकीय कार्यों में हिंदी और अंग्रेज़ी के प्रयोग से संबंधित एक महत्वपूर्ण अधिनियम है, जो भाषिक संतुलन बनाए रखने के लिए बनाया गया था।
भारत में हिंदी को अक्सर राष्ट्रीय भाषा समझा जाता है, लेकिन संवैधानिक रूप से हिंदी केवल राजभाषा है। यह लेख हिंदी को राष्ट्रीय भाषा न बनाए जाने के पीछे के ऐतिहासिक, संवैधानिक और सामाजिक कारणों को स्पष्ट करता है।
केंद्रीय सरकार के मंत्रालयों व विभागों के बीच पत्राचार हिंदी या अंग्रेज़ी में किया जा सकता है। ‘क’ क्षेत्र में हिंदी अनिवार्य है, जबकि ‘ख’ और ‘ग’ क्षेत्र में हिंदी या अंग्रेज़ी दोनों का उपयोग संभव है। अधीनस्थ कार्यालयों को पत्र मुख्यतः हिंदी में भेजे जाते हैं।
स्वतंत्र राष्ट्र की असली पहचान उसकी अपनी भाषा से होती है। महात्मा गांधी के अनुसार, राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र अधूरा है। भारत में हिंदी को राजभाषा का दर्जा इसलिए मिला क्योंकि यह न केवल स्वतंत्रता संग्राम की भाषा थी, बल्कि आज भी यह विश्व की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में एक है। देवनागरी लिपि की वैज्ञानिकता और हिंदी की व्यापकता इसे भारत की आत्मा बनाती है।
भारत सरकार द्वारा हिंदी को राजभाषा के रूप में लागू करने की दिशा में पहला संगठित प्रयास प्रथम राजभाषा आयोग (1955) और राजभाषा संसदीय समिति (1957) के गठन से शुरू हुआ। इन संस्थाओं ने हिंदी के क्रमिक प्रसार और अंग्रेज़ी के सीमित उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण सिफारिशें दीं, जो आज भी हिंदी नीति की नींव हैं।
The foundation of India’s official language policy was laid with the formation of the First Official Language Commission (1955) and the Parliamentary Committee on Official Language (1957). These bodies recommended a gradual increase in the use of Hindi and regulated use of English, shaping the roadmap for Hindi’s adoption as the official language.