
राजभाषा संकल्प, 1968 क्या है? इसके मुख्य बिंदु क्या हैं?
भारतीय गणतंत्र में भाषाई नीतियों को सुदृढ़ बनाने और हिंदी के विकास को एक राष्ट्रीय संकल्प के रूप में स्थापित करने में ‘राजभाषा संकल्प, 1968’ (Official Language Resolution, 1968) का बहुत बड़ा योगदान है। संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) द्वारा 18 जनवरी, 1968 को सर्वसम्मति से इस संकल्प को पारित किया गया था।
यह संकल्प राजभाषा नीतियों में केवल दिशा-निर्देश नहीं देता, बल्कि सरकार के लिए यह कानूनी रूप से अनिवार्य बनाता है कि वह हर साल संसद में राजभाषा की प्रगति की रिपोर्ट प्रस्तुत करे। इस लेख में हम राजभाषा संकल्प, 1968 के मूल उद्देश्य, इसके मुख्य बिंदुओं, त्रिभाषा सूत्र (Three-language formula) और इसे याद रखने की आसान शॉर्ट ट्रिक्स को विस्तार से समझेंगे।
विषय सूची (Table of Contents)
1. राजभाषा संकल्प, 1968 की पृष्ठभूमि
2. मूल कानूनी उद्धरण (Original Legal Citation)
3. संकल्प के 4 सबसे महत्वपूर्ण बिंदु
4. त्रिभाषा सूत्र और केंद्रीय सेवाओं में भर्ती
5. संकल्प 1968 को याद रखने की मजेदार शॉर्ट ट्रिक
6. निष्कर्ष (Conclusion)
7. राजभाषा संकल्प 1968 से जुड़े FAQs
1. राजभाषा संकल्प, 1968 की पृष्ठभूमि
वर्ष 1965 में संविधान के अनुसार अंग्रेजी की अनन्य स्थिति समाप्त होने वाली थी, जिससे दक्षिण भारतीय राज्यों में भाषाई असंतोष बढ़ा। इस असंतोष को दूर करने के लिए राजभाषा अधिनियम, 1963 पारित किया गया, जिसने अंग्रेजी के अनिश्चितकालीन प्रयोग की अनुमति दी।
इसके बाद, हिंदी के विकास और प्रसार को एक निश्चित और जवाबदेह समय सीमा में लाने के लिए तथा अहिंदी भाषी राज्यों के हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से संसद ने वर्ष 1968 में यह संयुक्त संकल्प (Resolution) पारित किया।
2. मूल कानूनी उद्धरण (Original Legal Citation)
राजभाषा संकल्प, 1968 के प्रस्ताव का मूल कानूनी अंश:
*”संसद के दोनों सदनों द्वारा यह संकल्प पारित किया गया है कि संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए हिंदी के प्रसार तथा विकास में और उसके प्रयोग में तेजी लाने के लिए भारत सरकार द्वारा एक अधिक गहन और व्यापक कार्यक्रम तैयार किया जाएगा और उसे कार्यान्वित किया जाएगा, और सरकार उसकी प्रगति की एक वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखेगी…”*
3. संकल्प के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु
राजभाषा संकल्प में चार प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जो निम्नलिखित हैं:
क. गहन और व्यापक कार्यक्रम का निर्माण
भारत सरकार को संघ के शासकीय कार्यों में हिंदी के उत्तरोत्तर प्रयोग को गति देने के लिए एक वार्षिक कार्यक्रम तैयार करने का दायित्व दिया गया। इसी के आधार पर राजभाषा विभाग हर साल राजभाषा वार्षिक कार्यक्रम जारी करता है।
ख. वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट (Annual Assessment Report)
संकल्प में यह अनिवार्य किया गया कि गृह मंत्रालय (राजभाषा विभाग) प्रतिवर्ष राजभाषा के प्रयोग की प्रगति से संबंधित एक वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार करेगा और उसे संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के पटल पर रखेगा।
ग. अष्टम अनुसूची की भाषाओं का विकास
संकल्प में संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल सभी भारतीय भाषाओं के समन्वित विकास पर बल दिया गया, ताकि देश की भाषाई विविधता और सांस्कृतिक एकता बनी रहे।
4. त्रिभाषा सूत्र और केंद्रीय सेवाओं में भर्ती
संकल्प, 1968 ने भारतीय शिक्षा प्रणाली और नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया में बड़े बदलावों को जन्म दिया:
क. त्रिभाषा सूत्र (Three-Language Formula)
शिक्षा के क्षेत्र में राज्यों के साथ मिलकर त्रिभाषा सूत्र लागू करने की बात कही गई:
* हिंदी भाषी राज्यों में: हिंदी, अंग्रेजी और कोई भी एक आधुनिक भारतीय भाषा (विशेष रूप से दक्षिण भारतीय भाषा)।
* अहिंदी भाषी राज्यों में: क्षेत्रीय भाषा, हिंदी और अंग्रेजी।
ख. केंद्रीय सेवाओं में भर्ती परीक्षा का माध्यम
संकल्प में कहा गया कि केंद्रीय सेवाओं (UPSC/SSC) की परीक्षाओं में बैठने के लिए उम्मीदवारों को हिंदी या अंग्रेजी में से किसी भी एक भाषा का ज्ञान होना आवश्यक है। भर्ती स्तर पर दोनों भाषाओं का अनिवार्य ज्ञान होना आवश्यक नहीं होगा, ताकि अहिंदी भाषी राज्यों के उम्मीदवारों के साथ कोई भेदभाव न हो।
5. संकल्प 1968 को याद रखने की मजेदार शॉर्ट ट्रिक
राजभाषा संकल्प, 1968 के मुख्य लक्ष्यों को याद रखने के लिए निम्नलिखित तुकबंदी को ध्यान में रखें:
“अड़सठ (68) में संसद ने लिया ‘संकल्प’,
वार्षिक रिपोर्ट ही है प्रगति का विकल्प,
त्रिभाषा सूत्र से मिटेगा भाषाई क्लेश,
हिंदी और प्रादेशिक भाषाओं से बढ़ेगा देश!”
*शॉर्ट ट्रिक विश्लेषण:*
* अड़सठ (1968): राजभाषा संकल्प पारित होने का वर्ष।
* संकल्प: संसद द्वारा पारित होने के कारण इसे ‘संकल्प’ (Resolution) कहा जाता है।
* वार्षिक रिपोर्ट: इसके तहत वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत करना अनिवार्य हुआ।
* त्रिभाषा सूत्र: स्कूल स्तर पर तीन भाषाएं पढ़ाने की सिफारिश।
6. निष्कर्ष
राजभाषा संकल्प, 1968 भारत की भाषाई नीतियों में राष्ट्रीय एकता और भाषाई न्याय का एक दस्तावेज है। इसने देश में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए सरकारी विभागों की संसदीय जवाबदेही सुनिश्चित की। आज भी गृह मंत्रालय का राजभाषा विभाग इस संकल्प के तहत अपनी वार्षिक रिपोर्ट संसद में पेश करता है, जो सरकारी कामकाज में हिंदी की वास्तविक प्रगति का आईना होती है।
7. राजभाषा संकल्प 1968 से जुड़े FAQs
Q1. राजभाषा संकल्प, 1968 संसद के दोनों सदनों द्वारा कब पारित किया गया था?
यह संकल्प 18 जनवरी, 1968 को संसद द्वारा पारित किया गया था।
Q2. राजभाषा संकल्प के तहत कौन सी सरकारी रिपोर्ट संसद में पेश करना अनिवार्य किया गया?
इसके अंतर्गत राजभाषा के प्रचार और प्रयोग की प्रगति से संबंधित ‘वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट’ (Annual Assessment Report) को संसद में पेश करना अनिवार्य किया गया।
Q3. राजभाषा संकल्प 1968 के तहत शिक्षा के क्षेत्र में किस सूत्र को लागू करने की सिफारिश की गई?
इसके तहत स्कूलों में शिक्षा के लिए ‘त्रिभाषा सूत्र’ (Three-language formula) को लागू करने की सिफारिश की गई।
Q4. संकल्प, 1968 के अनुसार केंद्रीय सेवाओं में भर्ती परीक्षा के लिए क्या भाषाई नियम है?
केंद्रीय सेवाओं में प्रवेश के लिए उम्मीदवार को हिंदी या अंग्रेजी में से किसी एक भाषा का ज्ञान होना आवश्यक है, दोनों का एक साथ होना अनिवार्य नहीं है।
Q5. यह संकल्प किस मंत्रालय द्वारा क्रियान्वित किया जाता है?
यह गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग द्वारा क्रियान्वित किया जाता है, जो इसकी वार्षिक रिपोर्ट तैयार करता है।
Q6. क्या इस संकल्प में 8वीं अनुसूची की अन्य भाषाओं का उल्लेख है?
हाँ, इस संकल्प में संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भारतीय भाषाओं के विकास और उनके बीच भाषाई समन्वय पर जोर दिया गया है।
Q7. राजभाषा अधिनियम 1963 और राजभाषा संकल्प 1968 में क्या मुख्य अंतर है?
राजभाषा अधिनियम एक कानूनी दस्तावेज (Act) है जो अंग्रेजी के प्रयोग की सीमा तय करता है, जबकि राजभाषा संकल्प एक नीतिगत संकल्प (Resolution) है जो हिंदी के विकास की वार्षिक निगरानी और त्रिभाषा सूत्र की नींव रखता है।
Q8. वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट संसद के अलावा और किसे भेजी जाती है?
यह रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में रखे जाने के साथ-साथ सभी राज्य सरकारों को भी भेजी जाती है।
